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दक्षिण बस्तर के सक्रिय पत्रकार मंगल कुंजाम की सुरक्षा को लेकर पत्रकार जगत चिंतित

पुलिस के अनुसार उनकी जान को है माओवादियों से खतरा, माओवादियों ने अब तक स्पष्ट नहीं किया है कि क्या है उनका रुख

नेशन अलर्ट / 97706 56789

दंतेवाड़ा.

माओवाद प्रभावित क्षेत्र दंतेवाड़ा से मंगल कुंजाम उन चुनिंदा पत्रकारों की फेहरिस्त में शामिल हैं जो मूल रूपेण आदिवासी पत्रकार हैं और एक्टिविस्ट जर्नलिज्म के लिए सुविख्यात हैं.

यही वजह थी कि उन्हें राजकुमार राव की फिल्म न्यूटन में भी एक पत्रकार की भूमिका मिली. लेकिन उनकी माओवादियों द्वारा हत्या की साजिश को अंजाम दिए जाने की ख़बरों ने उनके चाहने वालों के बीच खलबली मचा दी है.

वही पत्रकार जगत में मंगल कुंजाम की सुरक्षा को लेकर काफी चिंता व्यक्त की जा रही है.

मंगल कुंजाम के मुताबिक़ किरंदुल थाना प्रभारी ने उन्हें फोन पर कहा है दरभा डिविजन सचिव ने जान से मारने का फ़रमान जारी कर दिया हैं.

मालूम हो कि बस्तर में आदिवासियों की आवाज बुलंद करने के कारण मंगल कुंजाम पर सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग कर उन्हें नक्सलवाद के चक्रव्यूह में फसाने की साजिश रचने का सिलसिला काफी पुराना रहा है.

इन साजिशों के पीछे की वजह मंगल कुंजाम बताते हैं कि यह उनकी निष्पक्ष जन-पत्रकारिता का परिणाम है जिसके लिए उन्हें माओवादियों के जनताना सरकार इलाके में जाकर रिपोर्टिंग करनी पड़ती है जिसके कारण पुलिस और नक्सलियों के कृत्यों की जानकारी आम जनता तक पहुँचती है.

मंगल कुंजाम का कहना है कि बस्तर में पत्रकार दोधारी तलवार के बीच फंसे हैं. उनके खिलाफ जो ख़बरें पुलिस और नक्सलियों की तरफ से आ रहीं हैं वह किसी बड़े साजिश की ओर इशारा करती हैं.

जो माओवादियों और पुलिसिया तंत्र के बीच की कड़ी हो सकती है. जिसके चक्रव्यूह में उन्हें फंसाकर उनकी हत्या को अंजाम दिया जा सकता है.

ज्ञात हो कि माओवादी, पत्रकार मंगल कुंजाम के रिश्तेदारों की बीते 15 सालों से हत्या करते आ रहे हैं.

आप शायद भूल चुके हों लेकिन ये उन दिनों कि बात है जब बस्तर में सलवा जुडूम का दौर था. उस दौरान देश के कुख्यात नक्सली नेताओं में से एक बदरू उर्फ़ संजय पोटाम ने अपने नक्सली साथियों के साथ मिलकर पत्रकार मंगल कुंजाम के बुआ के लड़के की जघन्य हत्या कर दी थी.

राजकुमार मिडियामी गाँव का होनहार युवा था उसने 26 वर्ष की आयु में अपने गाँव गुमियापाल की तस्वीर बदलने की क्या ठानी, आदिवासियों को प्रताड़ित करने वाले कुख्यात माओवादी नेता बदरू उर्फ़ संजय पोटाम ने उनकी हत्या कर दी थी.

इसी महीने की 01 जुलाई को पत्रकार मंगल कुंजाम के जीजा मिट्ठू मरकाम निवासी मड़कामीरास उम्र 38 वर्ष की हत्या माओवादियों ने कर दी थी.

स्वर्गीय मिट्ठूराम एनएमडीसी किरंदुल में एल-2 पद पर कार्यरत थे. मिट्ठू पर नक्सलियों ने उनके मामले में दखल देने का आरोप लगाया था.

पत्रकार सुरक्षा कानून संयुक्त संघर्ष समिति के महासचिव कमल शुक्ला कहते हैं कि “मंगल कुंजाम और रमेश कुंजाम दोनों भाई उस गाँव से ताल्लुक रखते हैं जो पुलिस की नजर में भी है.

और आज तक जो घटनाएं हुई उससे कहा जा सकता है कि वह माओवादियों का प्रभाव क्षेत्र रहा है.

दोनों जागरूक युवा हैं और आदिवासी समुदाय के बहुत सारे आंदोलनों में इनकी सक्रीय भागीदारी रहती है, पत्रकारिता में भी भागीदारी रहती है.

निश्चित रूप से इस गाँव से ताल्लुक रखने वाला व्यक्ति इस गाँव से सामाजिक क्रियाकलापों में हस्तक्षेप कर रहा है, पत्रकारिता में हस्तक्षेप कर रहा है, तो बस्तर में ऐसे सारे लोगों के लिए पुलिस की तरफ से और नक्सलियों की तरफ से ख़तरा रहता है.

इसलिए मंगल कुंजाम और रमेश कुंजाम की सुरक्षा की जवाबदारी पुलिस की है. जैसे की मंगल कुंजाम के परिवार के कई सदस्यों की नक्सलियों ने हत्या की है उस तरह से मंगल कुंजाम की भी हत्या हो सकती है.

और पुलिस की जानकारी में यह बात है, उसके बाद भी मंगल कुंजाम की हत्या होती है तो पुलिस को जवाबदार माना जाएगा. ऐसे गाँव से माओवादी एक तो किसी बच्चे को शिक्षित होने नहीं देते, जागरूक होकर स्वतंत्र निर्णय लेकर कोई काम करने नहीं देते.

उसके बाद भी ये दोनों लड़के गाँव से बाहर निकल के समाज के हित में स्वतंत्र रूप से कुछ काम कर रहे हैं तो इनके उपर निश्चित रूप से ख़तरा है और यह ख़तरा ना केवल माओवादियों की तरफ से है बल्कि पुलिस की तरफ से भी है.

अगर पुलिस को पता है और पुलिस ने इत्तिला किया है कि तुम सावधान रहना तो इतना बोलने से नहीं होता है. यह पुलिस की जवाबदारी बनती है कि उनको सुरक्षित करो.

रमेश ने भी साल भर पहले बताया था कि उसके उपर ख़तरा है तो रमेश को मैंने अपने पास रायपुर बुला लिया था लॉकडाउन के पहले रमेश घर गया और वह वापस नहीं आ पाया.

रमेश और मंगल दोनों के जान की हमें चिंता है. अगर पुलिस या तो ऐसे दुष्प्रचार कर रही है या फिर ओ कोई फायदा उठाना चाहती है या किसी जननेता को मंगल कुंजाम की हत्या में फंसाना चाहती है.”

इस मामले को लेकर दंतेवाड़ा एसपी डा. अभिषेक पल्लव ने कहा है कि :

“मंगल के जीजा मिट्ठू मरकाम की हत्या हुई थी. उस समय नक्सलियों ने पर्चा जारी किया था. उसमें यह बात लिखी थी कि 20 हजार करोड़ का स्पंज आयरन प्लांट को मंगल कुंजाम बेच रहा है. नंदा नाम का नक्सली पकड़ा गया था उससे पूछताछ में बात आई थी. रेडियो इंटरसेप्शन में यह बात सामने आई थी. इनका और राजू भास्कर (जनपद सदस्य हिरोली गुमियापाल क्षेत्र) दोनों को ख़तरा है. यह हमारा खतरे का आकलन है. जब भी किसी को थ्रेट आता है तो उनको सूचित किया जाता हैं. अभी इस लेबल का थ्रेट नहीं आया है इसलिए अभी सुरक्षा की जरूतर नहीं है. जब थ्रेट आएगा तब हम मुख्यालय को इसकी सूचना देंगे”

मंगल कुंजाम ने व्हाट्सएप ग्रुप के अपने एक पोस्ट में बताया है कि :

‘‘किरंदुल टीआई ने फोन पर कहा है कि मंगल कहीं इधर उधर जाना नहीं, दरभा डिवीजन सचिव ने आपको जान से मारने के लिए आदेश दिया है. इस बावत टीआई के पास एसपी साहब का फोन आया था, तब मंगल कुंजाम के साथ स्थानीय पत्रकार अब्दुल हमीद सिद्दीकी भी थे’’

मंगल कहते हैं कि :

“पुलिस कभी अंदर कर देने की बात करती रही है, कभी माओवादी हत्या कर देंगे ऐसी ख़बरें भी आ रही हैं, मुझे फिर भी निष्पक्ष रहकर जनता के लिए पत्रकारिता करते रहना है.’

मंगल कुंजाम ने दक्षिण बस्तर पत्रकार संघ से मामले में दखल देने की अपील की है. दक्षिण बस्तर पत्रकार संघ के अध्यक्ष बप्पी राय ने कहा है कि अभी वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं है. पुलिस द्वारा जरूर मंगल को सूचना देने की खबर है किंतु माओवादियों के तरफ से अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है.

दक्षिण बस्तर पत्रकार संघ ने इस पूरे मामले पर सोशल मीडिया के माध्यम से माओवादियों के नाम एक पत्र जारी किया है और उनसे पूछा है कि वस्तु स्थिति स्पष्ट करें.

संघ के अनुसार मंगल एक जिम्मेदार पत्रकार है और ईमानदारी से अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहा है और पूरे छत्तीसगढ़ के पत्रकार मंगल के साथ हैं.

इस मुद्दे पर खबरी चिड़िया डॉट कॉम के संपादक प्रभात सिंह का कहना है कि पत्रकार मंगल कुंजाम व रमेश कुंजाम की सुरक्षा की जवाबदारी सरकार की है. पुलिस को जब पता है कि मंगल कुंजाम और किसी जन नेता की हत्या हो सकती है तो तत्काल उन्हें सुरक्षा प्रदान किया जाना चाहिए.

( साभार : भूमकाल समाचार )

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