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Mainpat, Chhattisgarh ka Shimla: छत्तीसगढ़ के इस हिल स्टेशन में गर्मी से मिलेगी राहत और साथ ही खुलेगा कौतूहलों का पिटारा भी…

Mainpat, Chhattisgarh ka Shimla: हरी-भरी वादियों के दामन में कौतूहलों का पिटारा छुपाए ‘मैनपाट’ को छत्तीसगढ़ का शिमला कहा जाता है।सर्दियों में यहां बर्फ भी गिरती है और गर्मियां ‘ गर्म ‘ नहीं होतीं। मैनपाट अनोखा है। इसके चप्पे-चप्पे पर हरियाली है और पल-पल में पलकों पर ठिठकती हैरानी है। हम ऐसा क्यों कह रहे हैं यह आपको आर्टिकल पढ़ने के बाद ही पता चलेगा। हाँ, फिलहाल इतना ज़रूर कह सकते हैं कि मैनपाट में विभिन्न जगहों पर लिखी एक बात बिल्कुल सटीक है- “मुस्कुराइए कि आप मैनपाट में हैं” क्योंकि वाकई यहां आकर आपके चेहरे पर मुस्कान तैर जाएगी और गर्मी से निज़ात मिलेगी सो अलग। तो कैसे इतना अनोखा है मैनपाट, आइए जानते हैं। 

‘छत्तीसगढ़ के शिमला’ की गोद में यहां पलता है ‘मिनी तिब्बत’ 

गर्मी के मौसम में जहां तन-मन को थोड़ी राहत मिल जाए, ऐसी जगह सब ढूंढते हैं। ऐसा ही एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है ‘मैनपाट’

समुद्रतल से इसकी ऊंचाई लगभग 3781 फीट है।आपको शायद यकीन न हो कि दिन में भी यहां सुकून देने वाली ठंडी हवा चलती है। 

यह सरगुजा जिले का एक ऐसा रोमांचक स्थल है जहां आप ‘मिनी तिब्बत’ भी देख सकते हैं। दरअसल चीनी आक्रमण के बाद यहां भारत सरकार ने तिब्बतियों को शरण दी थी। इसलिए बीते कुछ दशकों में ये तिब्बतियों का दूसरा घर भी बन गया है। उनके खान-पान और संस्कृति की झलक यहां पग-पग पर देखी जा सकती है। यहाँ विख्यात बौद्ध मठ भी है। 

० जलजली प्वाइंट, जहां बच्चों के साथ बड़े भी स्पंजी जमीन पर कूदने लगते हैं

ये जगह कुछ ऐसी है कि यहां आकर आप अपनी उम्र भूल जाएंगे और दोबारा बच्चे बन जाएंगे। जलजली प्वाइंट पर लगभग तीन एकड़ ऐसी जमीन है, जो काफी नर्म है और पैर रखने पर दबती है। यानी यह स्पंजी गद्दे जैसी है। जिसपर आप कूदते हैं तो यह दबता है और वापस स्पंज की तरह ऊपर आ जाता है। इस जगह का मज़ा लेने के लिए पेरेंट्स भी बच्चों का हाथ पकड़कर खूब कूदते हैं। 

वैज्ञानिकों का कहना है कि पृथ्वी के आंतरिक दबाव और पोर स्पेस (खाली स्थान) में सॉलिड के बजाए पानी भरे होने के कारण यह स्थान दलदली और स्पंजी लगती है। 

० उल्टा पानी, जहां पानी भूल जाता है अपना मूल स्वभाव, बहने लगता है ऊंचाई की ओर

पानी को उल्टा बहता देखा है आपने? पानी तो हमेशा ढलान की तरफ बहता है न! पर ‘उल्टा पानी’ में ऐसा नहीं है। यहां पानी ढलान पर उतरने के बजाय ऊंचाई पर चढ़ने लगता है। ये ऐसी जगह है जहां आप अगर अपनी गाड़ी को न्यूट्रल में खड़ी करते हैं, तो वह अपने आप पहाड़ी की ओर बढ़ने लगती है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि मैनपाट में इस जगह पर गुरुत्वाकर्षण बल से ज्यादा प्रभावी मैग्नेटिक फील्ड है, जो पानी या गाड़ी को ऊपर की तरफ खींचती है। आपको बता दें कि भारत में ऐसी सिर्फ 5 और दुनिया भर में 64 जगहें हैं।

टाइगर प्वाइंट में गरजता है पानी, उछलकूद मचाते हैं बंदर

टाइगर प्वाइंट पर महादेव मुदा नदी वाॅटरफाॅल बनाती है।लगभग 60 मीटर की ऊंचाई से गिरता हुआ पानी यहां टाइगर की तरह गरजता लगता है। इसलिए इसे टाइगर प्वाइंट कहा जाता है। वहीं स्थानीय लोगों के अनुसार वर्षों पहले यहाँ बाघों का आना-

जाना लगा रहता था। इसलिए इसे यह नाम मिला। टाइगर प्वाइंट पर महादेव मुड़ा नदी का सुंदरतम स्वरूप नज़र आता है। नदी के पास दुर्लभ वनौषधियां देखी जा सकती हैं। वहीं जंगल के बीच होने के कारण यहां ढेर सारे बंदर आते हैं। बच्चे बंदरों को खाना खिलाकर बहुत खुश होते हैं। 

पहाड़ों से घिरा है खूबसूरत मेहता प्वाइंट 

मैनपाट से लगभग 8 किमी दूर एक बेहद आकर्षक जगह है मेहता प्वाइंट। पर्वत श्रृंखलाओं से घिरे मेहता प्वाइंट में एक खूबसूरत झरना भी है। मेहता प्वाइंट में व्यूप्वाइंट बनाया गया है, जहां से सूरज को उगते और डूबते देखना बहुत अच्छा अनुभव है। यहां पर आप आकर कैंपिंग भी कर सकते हैं। वन विभाग ने भी यहां विश्राम घर बनाया है। 

फिश प्वाइंट में देखिए रंग-बिरंगी मछलियां और ‘मिल्की वे’ झरना

फिश प्वाइंट मैनपाट की एक और सुंदर जगह है। यहां पर आपको दो वाटरफॉल आमने-सामने देखने के लिए मिलते हैं। एक जगह जलधारा 48 मीटर की ऊंचाई से गिरती है। यह झागदार दूध जैसी धारा नजर आती है। वहीं ठीक सामने दूसरी धारा 80 मीटर की ऊंचाई से गिरती है। इस पतली दूधिया धारा को मिल्की वे भी कहा जाता है। यहाँ नीचे आकर बहती धाराओं में तैरती रंगीन मछलियाँ बहुत सुंदर नज़र आती हैं। 

परपटिया से देखिए सनसैट का अद्भुत नज़ारा

प्राकृतिक सौंदर्य को निहारने, सूर्यास्त के शानदार व्यू और शांति को महसूस करने के लिए परपटिया ज़रूर जाना चाहिए। मैनपाट के पश्चिमी छोर पर करीब 25 किमी दूर है परपटिया। यहाँ से विहंगम प्राकृतिक दृश्यावली, बंदरकोट की दुर्गम पहाड़ी, दूल्हा-दुल्हन पर्वत, रामगढ़ पर्वत आदि को भी देखे जा सकता है।बारिश के दिनों में यहां पूरा इलाका धुंध से ढंका रहता है। 

बौद्ध मंदिर में महसूस कीजिए महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं को 

तिब्बतियों की आस्था और धार्मिक- सामाजिक गतिविधियों का केंद्र हैं मैनपाट के बौद्ध मंदिर। यहाँ पहला मंदिर 1965 में बना था। दलाई लामा भी यहां आ चुके हैं। एक अन्य मंदिर में गौतम बुद्ध की 20 फीट ऊंची मूर्ति है। बाक्साइट से बनी यह मूर्ति बेहद सुन्दर है। देश भर से बौद्ध मतावलंबी और पर्यटक यहां आते हैं। इन मंदिरों को बौद्ध वास्तुकला के अनुरूप बनाया और सजाया गया है। तिब्बतियों के विभिन्न पर्व और विवाह विधियां भी यहां संपन्न होती हैं। मैनपाट आकर आपको तिब्बतियों की संस्कृति को समझने, करीब से देखने का मौका भी मिलेगा। 

कैसे पहुँचे मैनपाट 

वायु मार्ग : सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा रायपुर का स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा है जो यहाँ से लगभग 380 कि.मी. की दूरी पर है। एयरपोर्ट से मैनपाट पहुँचने के लिए बस या टैक्सी का इस्तेमाल कर सकते हैं। 

रेल द्वारा: रायगढ़ मैनपाट से 178 कि.मी. दूर और अंबिकापुर यहाँ से 80 कि.मी. दूर हैं, ये दोनों मैनपाट के नज़दीकी रेलवे स्टेशन हैं।

सड़क द्वारा: यह रायपुर और नजदीकी शहरों से सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

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